Class-10,CH-04,Q/A, Science, Carbon and its compound

 NCERT 

Science

 Questions answer

 Chapter 4 

Carbon and its compound


P.G-86

Q.1. CO₂ सूत्र वाले कार्बन डाइऑक्साइड की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होगी?

Ans :- 

कार्बन की परमाणु संख्या = 6

कार्बन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2,4

ऑक्सीजन की परमाणु संख्या = 8

ऑक्सीजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास =2,6

CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना 



Q.2. सल्फर की आठ परमाणु से बने सल्फर के अणु की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होगी?

Ans :-

सल्फर की परमाणु संख्या = 16

सल्फर का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2,8,6


P.G-94

Q.1. पेन्टेन के लिए आप कितने संरचनात्मक समावयवियों का चित्रण कर सकते हैं।

Ans :- 

पेन्टेन का अणु सूत्र = C₅H₁₂

 पेन्टेन के 3 संरचनात्मक समावयवी संभव है।




Q.2. कार्बन के दो गुणधर्म कौन-कौन से हैं जिनके कारण हमारे चारों और कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या दिखाई देती है।

Ans :- इसके मुख्यत: 2 गुण है जो कि निम्न है

(1) श्रृंखलन :- कार्बन में कार्बन के ही अन्य परमाणु क साथ आबंध बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है । जिससे बड़ी संख्या में अणु बनते हैं कार्बन के इस गुण को श्रृंखलन कहा जाता है।

(2) चतु: संयोजकता :-  क्योंकि कार्बन की संयोजकता चार होती है, अतः इसमें कार्बन के चार अन्य परमाणु अथवा कुछ अन्य तत्वों के परमाणु के साथ आबंधन की क्षमता होती है।


Q.3. साइक्लो पेन्टेन का सूत्र तथा इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होगी?

Ans:- 

साइक्लोपेंटेन का अणु सूत्र =  C₅H₁₂

कार्बन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2,4

हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 1

साइक्लोपेंटेन की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना



Q.4. निम्न यौगिकों की संरचना चित्रित कीजिए।

(1) एथेनोइक अम्ल

(2) ब्रोमोंपेंटेन

(3) ब्यूटेनोन

(4) हेक्सेनैल

क्या ब्रोमोंपेंटेन के संरचनात्मक समावयवी संभव है?

Ans:-

(1) एथेनोइक अम्ल


(2) ब्रोमोंपेंटेन


(3) ब्यूटेनोन

(4) हेक्सेनैल



ब्रोमोंपेंटेन के 3 संरचनात्मक समावयवी संभव है। जो कि निम्न है।



Q. 5. निम्न यौगिकों का नामकरण कैसे करेंगे?

1. ब्रोमोएथेन

2. मेथेनल

3. हेक्साइन या 1-हेक्साइन

Ans :-




P.G-97

Q.1. एथेनॉल से एथेनोइक अम्ल में परिवर्तन को ऑक्सीकरण अभिक्रिया क्यों कहते हैं?

Ans :-




क्योंकि इस अभिक्रिया में एथेनॉल में एक ऑक्सीजन जुड़ती  है इसलिए यह ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहलाती है।

Q.2. ऑक्सीजन तथा एथाइन के मिश्रण का दहन वेल्डिंग के लिए किया जाता है। क्या आप बता सकते हैं कि एथाइन तथा वायु के मिश्रण का उपयोग क्यों नहीं किया जाता?

Ans :- 

जब एथाइन का दहन वायु की उपस्थिति में किया जाता है तो यह काली ज्वाला उत्पन्न करता है। यह वायु की आपूर्ति को सीमित कर देने से अपूर्ण दहन होने के कारण होता है। जबकि यदि एथाइन का दहन ऑक्सीजन में किया जाता है तो यह संपूर्ण दहन के कारण  स्वच्छ लौ देता है। वेल्डिंग के लिए आवश्यक उच्च ऊष्मा उत्पन्न करने के उद्देश्य से एथाइन का पूर्ण दहन ऑक्सीजन की उपस्थिति में किया जाता है।


P.G-101

Q.1. प्रयोग द्वारा आप एल्कोहाल तथा कार्बोलिक अम्ल में कैसे अंतर कर सकते हैं?

Ans :- 


Q.2. ऑक्सीकारक क्या है?

Ans:-  कुछ पदार्थों में अन्य पदार्थों को ऑक्सीकरण के लिए ऑक्सीजन देने की क्षमता होती है या हाइड्रोजन को अलग करने में सहायक होते हैं वह ऑक्सीकारक कहलाते हैं।


P.G-103

Q.1. क्या आप डिटर्जेंट का उपयोग कर बता सकते हैं कि कोई जल कठोर है अथवा नहीं?

Ans :- डिटर्जेंट कठोर और मृदु दोनों प्रकार के जल के साथ झाग उत्पन्न करता है, जबकि साबुन मृदु जल के साथ ही झाग उत्पन्न करता है। इसलिए डिटर्जेंट का उपयोग कर यह बता पाना कि कोई जल कठोर है अथवा नहीं असंभव है।

Q.2. लोग विभिन्न प्रकार से कपड़े धोते हैं, सामान्यत: साबुन लगाने के बाद लोग कपड़े को पत्थर पर भटकते हैं, डंडे से पीटते हैं, ब्रुश से रगड़ते हैं या वाशिंग मशीन में कपड़े रगड़े जाते हैं। कपड़ा साफ करने के लिए उसे रगड़ने की आवश्यकता क्यों होती है?

Ans :- एक साबुन के उनके 2 भाग होते हैं जिसे जल रागी तथा जल विरागी कहते हैं। इसकी सहायता से तेलीय मेल मिसेल के केंद्र में एकत्र हो जाते हैं। मिसेल, विलयन में कोलाइड के रूप में बने रहते हैं इस मिसेल को हटाने के लिए कपड़ों को रगड़ना आवश्यक होता है।


Exercise 

Q 1. एथेन का आणविक सूत्र  C₂H₆ है इसमें -

(1) 6 सहसंयोजक आबंध है

(2) 7 सहसंयोजक आबंध है

(3) 8 सहसंयोजक आबंध है

(4) 9 सहसंयोजक आबंध है

Ans :-(2) 7 सहसंयोजक आबंध है


Q.2. ब्यूटेनोन चर्तु कार्बन यौगिक है जिसका प्रकार्यात्मक समूह

(1) कार्बोलिक अम्ल

(2) एल्डिहाइड

(3) कीटोन

(4) एल्कोहल

Ans:- (3) कीटोन

Q.3. खाना बनाते समय यदि बर्तन की तली बाहर से काली हो रही है तो इसका मतलब है कि

(1) भोजन पूरी तरह नहीं पका है।

(2) ईंधन पूरी तरह से नहीं जल रहा है।

(3) ईंधन आद्र है।

(4) ईंधन पूरी तरह से जल रहा है।

Ans:- (2) ईंधन पूरी तरह से नहीं जल रहा है।

Q.4.  CH₃Cl में आबंध निर्माण का उपयोग कर सह संयोजक बंध की प्रकृति समझाइए।

Ans :-

कार्बन में  संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या चार होती है। इसके 1 - 1 इलेक्ट्रॉन हाइड्रोजन के तीन अणु के साथ तथा 1 इलेक्ट्रॉन क्लोरीन के अणु के साथ साझेदारी करते हैं कार्बन तथा क्लोरीन के अणुओं के बीच सह संयोजी आबंध होता है लेकिन क्लोरीन की उच्च विद्युत ऋणात्कता के कारण कार्बन तथा क्लोरीन के आबंध की प्रकृति ध्रुवीय होती है।

Q.5. इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाइए:

(a) एथेनोइक अम्ल

(b) H₂S

(c) प्रोपेनॉन

(d) F₂

Ans :- 

(a) एथेनोइक अम्ल :-

(b) H₂S :-

(c) प्रोपेनॉन :-

(d) F₂ :- 



Q.6. समजातीय श्रेणी क्या है उदाहरण के साथ समझाइए।

Ans :-  यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें कार्बन श्रृंखला में स्थित हाइड्रोजन को एक ही प्रकार का प्रकार्यात्मक समूह स्थापित करता है, उसे समजातीय श्रेणी कहते हैं।

Ex

मेथेन  CH₄ 

एथेन  C₂H₆

प्रोपेन C₃H₈

यहां देखा जा सकता है कि प्रत्येक यौगिकों के -CH₂ बीच इकाई का अंतर है।


Q.7. भौतिक एवं रासायनिक गुण धर्मों के आधार पर एथेनॉल एवं एथेनोइक अम्ल में आप कैसे अंतर करेंगे?

Ans:-

भौतिक गुण :-

1. एथेनॉल की गंध अभिलाक्षणिक एल्कोहली ही होती है जबकि एथेनोइक अम्ल की गंध तीव्र होती है।

2. एथेनॉल का गलनांक 156 केल्विन होता है जबकि एथेनोइक अम्ल का गलनांक 290 केल्विन होता है।

3. एथेनॉल का क्वथनांक 351 केल्विन होता है जबकि एथेनोइक अम्ल का क्वथनांक 391 केल्विन होता है।

रासायनिक गुण :-

1. एथेनॉल लिटमस पेपर पर कोई परिवर्तन नहीं करता है जबकि एथेनोइक अम्ल लिटमस पेपर को लाल कर देता है।

2. एथेनॉल सोडियम कार्बोनेट से कोई क्रिया नहीं करते हैं जबकि एथेनोइक अम्ल सोडियम कार्बोनेट के साथ क्रिया कर कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न करते हैं।


Q.8. जब साबुन को जल में डाला जाता है तो मिसेल का निर्माण क्यों होता है? क्या एथेनॉल जैसे दूसरे विलायकों में भी मिसेल का निर्माण होगा।

Ans:- साबुन को जल में डालने पर मिसेल बनता है क्योंकि साबुन में दो सिरे होते हैं एक लंबी हाइड्रोकार्बन पहुंच तथा एक ऋणात्मक सिरा। पूंछ जल विरोधी व सिर जलरागी होता है। जब यह जल जैसे ध्रुवीय विलायक के साथ क्रिया करते हैं तो आवेशित भाग के कारण जल रागी भाग आ जाता है अतः वे साबुन के अणुओं के सिर को चारों ओर से घेर कर गुच्छों का निर्माण करते हैं और झाग का भी निर्माण करते हैं एथेनॉल ध्रुवीय विलायक नहीं है इसलिए यह साबुन के साथ झाग नहीं बनाते हैं।

Q.9. कार्बन एवं उसके यौगिक ओं का उपयोग अधिकतर अनुप्रयोगों में ईंधन के रूप में क्यों किया जाता है?

Ans :- कार्बन एवं उसके यौगिक दहन के फल स्वरुप अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करते हैं। इनका दहन नियंत्रित करना सरल है तथा ज्वलन ताप भी सामान्य है अतः इनके योगिक को ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है।


Q.10. कठोर जल को साबुन से उपचारित करने पर जाग के निर्माण को समझाइए।

Ans :- कठोर जल में कैल्शियम तथा मैग्नीशियम के सल्फेट एवं क्लोराइड के घुलनशील लवण होते हैं । जो साबुन से अभिक्रिया कर अघुलनशील पदार्थ बनाते हैं इसी अघुलनशील पदार्थ के कारण झाग आसानी से नहीं बनता है तथा साबुन अधिक मात्रा में उपयोग करना पड़ता है।


Q.11. यदि आप लिटमस पेपर (लाल एवं नीला) से साबुन की जांच करें तो आपका प्रेक्षण क्या होगा?

Ans :- साबुन क्षारीय प्रकृति का होता है अतः यह लिटमस पेपर को नीले रंग में परिवर्तित कर देता है।


Q.12. हाइड्रोजनीकरण क्या है?  इसका औद्योगिक अनुप्रयोग क्या है?

Ans:- असंतृप्त हाइड्रोकार्बन, हाइड्रोजन से योग करके संतृप्त यौगिक बनाते हैं। यह प्रक्रिया हाइड्रोजनीकरण कहलाती है। इस प्रक्रिया को तेल से भी बनाने में प्रयोग किया जाता है।


Q.13. दिया गया हाइड्रोकार्बन C₂H₆,C₃H₈,C₃H₆, C₂H₂एवं CH₄ में किसमें संकलन अभिक्रिया होती है?

Ans:- C₂H₂ एवं C₃H₆ में योग अभिक्रिया होगी क्योंकि यह असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है।



Q.14. मक्खन एवं खाना बनाने वाले तेल के बीच रासायनिक अंतर समझने के लिए एक परीक्षण बताइए।

Ans:- मक्खन एक संतृप्त हाइड्रोकार्बन है जबकि खाना बनाने वाला तेल असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है।

परीक्षण - ब्रोमीन जल द्वारा :- दो अलग-अलग परखनली लेकर एक में तेल तथा दूसरे में मक्खन लेते हैं दोनों परखनलियों में ब्रोमीन जल की कुछ बूंद डालते हैं । दोनों परखनलियों को धीरे-धीरे गर्म पर  हम देखते हैं कि तेल वाली परखनली में जल का रंग उड़ जाता है।

Q.15. साबुन की सफाई प्रक्रिया की क्रियाविधि समझाइए।

Ans:-जब पानी में साबुन घोला जाता है, तो जल रागी सिरा जल में घुलनशील तथा जल विरागी सिरा जल में घुलनशील परंतु तेलिया एवं वसा आदि में घुलनशील होते हैं । किसी कपड़े पर साबुन के अणु इस प्रकार व्यवस्थित हो जाते हैं कि इनका आयनिक सिरा जल के अंदर तथा हाइड्रोकार्बन पूंछ जल के बाहर होती है । ऐसा अणुओं का बड़ा गुच्छा बनने के कारण होता है। इसमें जल विरागी पूंछ के आंतरिक हिस्से में होती है जबकि उसका आयनिक सिरा गुच्छे की सतह पर होता है इस रचना को मिसेल कहते हैं । तेलीय मेल मिसेल के केंद्र में एकत्र हो जाता है । मिसेल विलयन में कोलाइड के रूप में बना रहता है तथा आयन आयन विकर्षण के कारण वह अवक्षेपित नहीं होता। अतः मिसेल में तैरता मेल रगड़ कर या डंडों से पीटकर आसानी से हटाया जा सकता है।












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