विषय विज्ञान
अध्याय 15
हमारा पर्यावरण
कक्षा 10
पर्यावरण में हमारा भौतिक परिवेश जैसे वायु, जलाशय, मृदा तथा सभी जीव जैसे पेड़ पौधे, प्राणी और सूक्ष्मजीव जैसे जीवाणु तथा कवक शामिल होते हैं।
परि + आवरण = पर्यावरण
अपशिष्ट पदार्थ:- अपशिष्ट पदार्थों को दो प्रमुख भागों में बांटा जा सकता है।
1. जैव निम्नीकरण अपशिष्ट
2. जैव अनिम्नीकरण अपशिष्ट
1. जैव निम्नीकरण अपशिष्ट:- वह अपशिष्ट पदार्थ जिन्हें उचित समय में प्रकृति में सूक्ष्म जीवों जैसे निश्चित जीवाणुओं की क्रिया द्वारा विभिन्न पदार्थों में तोड़ा जा सकता है जैव निम्नीकरण अपशिष्ट कहलाते हैं।
उदाहरण- गोबर, कंपोस्ट, हड्डियां, कागज, लकड़ी, पत्तियां, फूल आदि।
2. जैव अनिम्नीकरण अपशिष्ट :- वे अपशिष्ट पदार्थ जिन्हें प्रकृति में विषहीन या अहानिकारक पदार्थों में तोड़ा नहीं जा सकता जैव निम्नीकरण अपशिष्ट कहलाते हैं।
उदाहरण- प्लास्टिक, कांच, धातुएं, डीडीटी आदि।
परितंत्र या इकोसिस्टम :- किसी स्थान विशेष में पाए जाने वाले जैविक तथा अजैविक घटकों के पारस्परिक संबंधों को सामूहिक रूप से परितंत्र कहते हैं।
उदाहरण :- जंगल, मरुस्थल, पहाड़, तालाब, झील आदि।
परितंत्र के घटक :- परितंत्र के दो प्रमुख घटक हैं।
1- जैविक घटक
2- अजैविक घटक
1- जैविक घटक(सजीव) :- समस्त जंतु एवं पौधे जीव मंडल में जैविक घटक के रूप में पाए जाते हैं इसे निम्न भागों में विभाजित किया जा सकता है।
(1) उत्पादक
(2) उपभोक्ता
(3) अपघटक
(1) उत्पादक :- हरे प्रकाश संश्लेषी पौधे उत्पादक कहलाते हैं यह अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। जैसे पेड़ पौधे
** ये स्वपोषी कहलाते हैं।
(2) उपभोक्ता :- यह भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं तथा पौधों द्वारा बना भोजन ग्रहण करते हैं। जैसे प्राणी
उपभोक्ता तीन प्रकार के होते हैं।
1:- शाकाहारी (प्रथम श्रेणी उपभोक्ता) :- ये अपना भोजन केवल पौधों से प्राप्त करते हैं।
उदाहरण:- बकरी, भेड़, हिरण, घोड़ा, बैल, हाथी आदि।
2:- मांसाहारी (द्वितीय श्रेणी उपभोक्ता) :- वह प्राणी जो भोजन के रूप में केवल दूसरे प्राणियों का मांस खाते हैं मांसाहारी कहलाते हैं।
उदाहरण:- शेर, बाघ, मेंढक, सांप, बाज आदि।
3:- सर्वाहारी ( तृतीय श्रेणी उपभोक्ता) :- वह प्राणी जो पौधों तथा प्राणियों दोनों को खाते हैं सर्वाहारी कहलाते हैं।
उदाहरण :- मनुष्य, कुत्ता, बिल्ली, कौवा, चींटी आदि।
(3) अपघटक :- वह सूक्ष्मजीव जो मृत जीवो जैसे मृत पौधों और प्राणियों तथा उनके उत्पाद जैसे मल मूत्र इत्यादि में उपस्थित जटिल कार्बनिक यौगिकों को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं अपघटक कहलाते हैं।
उदाहरण: - सूक्ष्मजीव
2- अजैविक घटक( निर्जीव) :- इसके अंतर्गत निर्जीव वातावरण आता है जो विभिन्न जैविक घटकों का नियंत्रण करता है अजैव घटक को निम्न तीन उप घटकों में विभाजित किया गया है।
(1) अकार्बनिक:- इसके अंतर्गत पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, आयरन के लवण ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि आते हैं।
(2) कार्बनिक:- इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा आदि आते हैं।
(3) भौतिक घटक :- इसमें वायु प्रकाश ताप विद्युत आदि आते हैं।
आहार श्रृंखला:- भोजन आहार श्रृंखला द्वारा एक जीव से दूसरे जीव को स्थानांतरित हो सकता है। आहार श्रृंखला का प्रारंभिक बिंदु उत्पादक होता है। सभी आहार श्रृंखलाएं हरे पौधे से आरंभ होती है जो सभी भोजन का मूल स्रोत है।
समुदाय में जीवित जीवो का अनुक्रम जिसमें एक जीव, भोजन उर्जा हस्तांतरित करने के लिए किसी दूसरे जीव का उपयोग करता है, आहार श्रृंखला कहलाता है।
खाद्य जाल:- किसी पारिस्थितिक तंत्र में प्रचलित अंतः संबंधित आहार श्रृंखला जो विभिन्न जातियों के बीच संबंधों का तंत्र बनाती है खाद्य जाल कहलाता है।
पोषण स्तर:- आहार श्रृंखला में विभिन्न चरण जिन पर भोजन का स्थानांतरण होता है पोषण स्तर कहलाते हैं।
आहार श्रृंखला में किसी जीव को निरूपित करने वाला प्रत्येक चरण पोषण स्तर या पोषी स्तर बनाता है।
** पौधे उत्पादक (स्वपोषी) होते हैं जो प्रथम पोषण स्तर बनाते हैं।
** शाकाहारी (पौधों से भरण करते हैं) द्वितीय पोषण स्तर बनाते हैं।
** मांसाहारी (शाकाहारियों से भरण करते हैं) तृतीय पोषण स्तर बनाते हैं।
** शीर्ष मांसाहारी (छोटे मांसाहारियों से भरण करते हैं) चतुर्थ पोषण स्तर बनाते हैं।
आहार श्रृंखला में पोषण स्तरों की संख्याओं को पिरामिड द्वारा निरूपित किया जा सकता है।
आहार श्रृंखला के प्रत्येक पोषी स्तर पर जीवित जीवो के शरीर में हानिकारक रासायनिक पदार्थों जैसे कीटनाशकों के सांद्रण में वृद्धि, जैविक आवर्धन कहलाता है।
दस प्रतिशत नियम :- इसके अनुसार जीवो के एक विशेष पोषी स्तर में प्रवेश करने वाली ऊर्जा का केवल 10% ही अगले उच्चतर पोषी स्तर को हस्थानांतरण के लिए उपलब्ध होता है।
प्रत्येक पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा पिछले स्तर की 10% होती है।
ओजोन परत की क्षीणता :- ओजोन के अणु ऑक्सीजन के 3 परमाणुओं से बनते हैं यह एक विषैली गैस है यह ऊपरी वायुमंडल में एक परत है।
ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि सूर्य से आ रहे हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों में अधिकांश को यह अवशोषित कर लेती है, और पृथ्वी पर पहुंचने से पहले उन्हें रोक लेती है।
** ओजोन परत की क्षति CFC(क्लोरोफ्लोरोकार्बन) नामक रसायनों के प्रयोग के कारण होती है।
** CFC का उपयोग रेफ्रिजरेटर वातानुकूलन एवं अग्निशामक में किया जाता है।
सुपोषण:- पोशाकों का अत्यधिक संभरण तथा से वालों की वृद्धि या फलने फूलने के फल स्वरुप जल में ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आने की प्रक्रिया को सुपोषण किया यूट्रॉफिकेशन कहते हैं।
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Priya Shu
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